Ram Ki Paidi Ayodhya Tour And Information
;
सरयू नदी के किनारे स्थित घाटों की एक श्रंखला है , इस जगह पर सरयू नदी का बहाव पूर्व दिशा की तरफ हो जाता था। मंदिर को लेकर पौराणिक कथा थी कि राम के पुत्र कुश की पत्नी नागवंश से होने के कारण भगवान शिव की उपासक थी। सरयू में स्नान करने के बाद वह रोज अपनी पत्नी के साथ अयोध्या के सुख समृद्धि के लिए इसी मंदिर में ध्यान किया करते थे। आज भी यह मंदिर सरयू नदी के किनारे राम की पैडी नामक घाट पर स्थित है। आज की अयोध्या जिस रूप में दिखाई पड़ती है उसकी रूपरेखा राजा विक्रमादित्य के नवरत्नों द्वारा तैयार की गई थी। माना जाता है कि उन्होंने एक वर्ष के प्रत्येक दिन के लिए रामायण के प्रत्येक पात्रों के लिए तीनसौपैंसठ मंदिरों का निर्माण करवाया था। इसमें वराहमिहिर का ग्रह नक्षत्रों की स्थित के आधार पर अयोध्या को वास्तु शास्त्र के सर्वथा अनुकूल बसाने में गहरा चिंतन था। उन्होंने न सिर्फ इस नगर को बसाया बल्कि रामायण के सभी पात्रों के नाम पर कई भव्य मंदिरों घाटों का निर्माण किया। जिसके बाद समय समय पर इस नगर की भव्यता ने लोगों को यहां पर आकर्षित किया।आगे चलकर कई राजा संत डोम अलग अलग धर्मो के लोगों ने यहां पर अपने अपने आस्था के केन्द्रों को भी स्थापित किया, जिसमें बौद्ध जैन, मुगल आदि विभिन्न धर्मों से लेकर गुप्त नन्द मौर्य, रविशंकर वंश के राजा भी शामिल थे। पूर्णिमा के दिन इस स्थान की सुन्दरता देखते बनती है । श्रधालुओं में ऐसी मान्यता है कि यहाँ स्नान करने से पाप धुल जाते हैं ऐसा माना जाता है कि जो भक्त इस घाट पर डुबकी लगाता है उसे पापों से मुक्ति मिल जाती है।घाटों का निर्माण श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए उन्नीससौचौरासी से उन्नीससौपचाशी के दौरान किया गया था। राम की पैडी में मा सरयू की सायंकाल आरती छे बजे से सात के बीच में होती है.जहां दूरदराज से आए श्रद्धालु आरती में शामिल होकर अपने आप को सौभाग्यशाली समझते हैं.

0 Comments