Nageshwar Nath Mandir Ayodhya | नागेश्वर नाथ मंदिर अयोध्या की मान्यताएं

 नागेश्वर नाथ मंदिर अयोध्या जी -


करीब आठ हजार मठ-मंदिरों वाली रामनगरी अयोध्या के हर मंदिर की अपनी अलग मान्यताएं हैं, उसकी अपनी परंपराएं हैं, आज हम ऐसे ही एक मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसकी स्थापना भगवान राम के पुत्र कुश ने की थी. राम की बेल पुराणों के अनुसार अयोध्या को प्रभु श्रीराम के पूर्वज मनु और इक्ष्वाकु ने स्थापित किया था। इन्हीं के चौंसठवें वंशज श्रीराम के बाद गुजरे हुए अयोध्या को कुश ने फिर से बसाया। लेकिन अयोध्या कितनी बार बसी कितनी बार उजड़ी इसका कोई भी उल्लेख न तो पुराणों में मिलता है न ही इतिहास में। कुछ विशेषज्ञ ऐसा मानते हैं कि उज्जैन के राजा विक्रमादित्य ने लगभग दो हज़ार वर्ष पहले अयोध्या के प्राचीन नगर की खोज करने के लिए सरयू नदी के किनारे कई प्राचीन शिव मंदिरों की प्रमाणिकता को लेकर गहन अध्ययन किया। विक्रमादित्य के नवरत्नों में आम कालिदास घटकर पर वेताल भट, शपथ वराहमिहिर, वररुचि, शंकु, अमरसिंह एवं धनवंतरी शामिल थे। इन लोगों ने रामायण के आधार पर अयोध्या को खोजने एवं पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आखिरकार उनकी यात्रा बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक नागेश्वरनाथ मंदिर पर आकर समाप्त हुई।यह मंदिर राजा विक्रमादित्य के शासन काल तक अच्छी स्थित में था । में इसका जीर्णोधार नवाब सफ़दरजंग के मंत्री नवल राय द्वारा कराया गया था । शिवरात्रि का पर्व इस मंदिर में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है, यहाँ शिव बारात का भी बड़ा महात्म्य है । शिवरात्रि के पर्व में यहाँ लाखों की संख्या में दर्शनार्थी एवं श्रद्धालु उपस्थित होते हैं ।

Post a Comment

0 Comments